लॉकडाउन में पेट की भूख मिटाने के लिए गरीब महिला ने बेचा गैस सिलेंडर और चूल्हा

Patna:- फतुहा कल्याणपुर की रहने बाली 60 वर्षीय विधवा जमीला खातून अपने बेटे के साथ किराए के मकान में रहती है। हाल ही में दो महीने पहले उसने 2300 रु में सिंगल गैस सिलेंडर के साथ चूल्हा खरीदा था। जिसे उसने मात्र 1000 रुपया में पेट की भूख मिटाने के लिए बेच दिया। जमीला खातून अपने बेटे के साथ फुटपाथ पर रेडीमेड कपड़ा बेचने का काम करती थी।
इसी से दोनों माँ बेटे का जीवन चलता था। कई महीनों तक कम खर्च करने के बाद उसने कुछ रुपया इकट्ठा किया था। जिससे उसने यह गैस सिलेंडर खरीदा था। लेकिन 21 दिनों के लॉकडाउन से उसका धन्धा बन्द हो गया। रोज कमाने खाने बाला यह छोटा सा परिवार को भूखे रहने की नौबत आ गई। किसी तरह कुछ दिन बिताने के बाद जब दो दिन भूखा रहना पड़ा तब पेट की भूख के आगे गैस सिलेंडर और चूल्हा हार गया। मजबूरी बस उसे सस्ते दामों में बेचना पड़ा।
जमीला खातून जैसे कई ऐसे लोग हैं जो दिहाड़ी मजदूरी या कोई छोटे मोटे काम धन्धा करके अपना जीवन यापन करते हैं। लेकिन 21 दिनों के तालाबन्दी से अब इन लोगों को खाने के लिए भी तरसना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इन लोगों के पास ऐसी कोई कागजात भी नही है जिससे वो सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इसीलिए जमीला खातून को गैस सिलेंडर खरीदते समय उज्वला योजना का लाभ नही मिला।
जमीला खातून जैसे कई ऐसे लोग हैं जो दिहाड़ी मजदूरी या कोई छोटे मोटे काम धन्धा करके अपना जीवन यापन करते हैं। लेकिन 21 दिनों के तालाबन्दी से अब इन लोगों को खाने के लिए भी तरसना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इन लोगों के पास ऐसी कोई कागजात भी नही है जिससे वो सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इसीलिए जमीला खातून को गैस सिलेंडर खरीदते समय उज्वला योजना का लाभ नही मिला।
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